5 hours ago

    कॉमनवेल्थ गेम्स में अलीगढ़ के लाल गुलवीर सिंह ने रचा इतिहास, 10,000 मीटर दौड़ में जीता रजत पदक

    अलीगढ़, 29 जुलाई 2026 (ह स): कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में अलीगढ़ के लाल और अंतरराष्ट्रीय धावक गुलवीर सिंह ने शानदार…
    5 hours ago

    अलीगढ़ में रेड रन मैराथन का आयोजन, युवाओं को एचआईवी/एड्स के प्रति किया गया जागरूक

    अलीगढ़, 29 जुलाई 2026 (ह स): राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण कार्यक्रम (एनएसीपी) के तहत अलीगढ़ में “रेड रन मैराथन” का आयोजन…
    5 hours ago

    शाह जमाल, चर्खवालान और जंगल गढ़ी में जलभराव से मिलेगी राहत, 2 पंपिंग स्टेशन और RCC नाले को मंजूरी

    अलीगढ़, 29 जुलाई मोहम्मद कामरान अलीगढ़ शहर के निचले इलाकों शाह जमाल, चर्खवालान, जंगल गढ़ी और सराय रहमान में वर्षों…
    5 hours ago

    जौहर यूनिवर्सिटी छात्र आंदोलन के समर्थन में अलीगढ़ का प्रतिनिधिमंडल रामपुर पहुंचा, डॉ. सलमान इम्तियाज ने छात्रों के संघर्ष को सराहा

    अलीगढ़, 29 जुलाई मोहम्मद कामरान अलीगढ़:  एएमयू छात्र संघ पूर्व अध्यक्ष और कांग्रेस नेता डॉ. मोहम्मद सलमान इम्तियाज के नेतृत्व…
    8 hours ago

    एएमयू में ‘वन महोत्सव’ पौधारोपण अभियान का शुभारंभ

    अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय ने पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी दीर्घकालिक प्रतिबद्धता और देश के सबसे हरित आवासीय परिसरों में अपनी पहचान को आगे बढ़ाते हुए राष्ट्रीय अभियान ‘एक पेड़ माँ के नाम’ के अंतर्गत मेडिकल कॉलोनी स्थित ए-टाइप आवासों के निकट ‘वन महोत्सव’ पौधारोपण अभियान का शुभारंभ किया। कार्यक्रम का उद्घाटन कुलपति प्रो. नइमा खातून ने किया। इस अवसर पर सहकुलपति प्रो. मोहम्मद मोहसिन खान, कुलसचिव प्रो.…
    9 hours ago

    एएमयू शिक्षक द्वारा आईआईटी बॉम्बे में दिया आमंत्रित व्याख्यान

    अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग के प्रो. एस. एम. खान ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, बॉम्बे के मानविकी एवं सामाजिक…
    9 hours ago

    एएमयू के छात्रों ने सिंगापुर में प्रतिष्ठित एशियन अंडरग्रेजुएट संगोष्ठी में भारत का प्रतिनिधित्व किया

     अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के आठ विद्यार्थियों ने सिंगापुर में नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ सिंगापुर और आसियान यूनिवर्सिटी नेटवर्क द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित प्रतिष्ठित एशियन अंडरग्रेजुएट सिम्पोजियम (एयूएस) 2026 में विश्वविद्यालय और भारत का प्रतिनिधित्व किया। ‘कम्युनिटीज इन एक्शन’ विषय पर आयोजित इस अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी में भारत, सिंगापुर, जापान, दक्षिण कोरिया और चीन सहित…
    9 hours ago

    एनईपी 2020 के छह वर्ष: छात्र-केंद्रित शिक्षा व्यवस्था की दिशा में भारत की ऐतिहासिक यात्रा को नमो अध्ययन केन्द्र का नमन

    टीएनएन समाचार, 29 जुलाई 2026। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के छह वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर सेंटर फॉर…
    9 hours ago

    Six Years of NEP 2020: CNMS Salutes India’s Journey Towards a Student-Centric Education System

    TNN News, July 29, 2026: The Centre for NaMo Studies (CNMS) commemorated six years of the National Education Policy (NEP)…
    9 hours ago

    जन्म शताब्दी वर्ष : गाज़ीपुर की मिट्टी, भारत की रूह : राही मासूम रज़ा की कालजयी विरासत – प्रो. जसीम मोहम्मद

    इस भौतिक संसार में दो तरह के लेखक–रचनाकार होते हैं—एक वे जो केवल पुस्तकें लिखकर छोड़ जाते हैं, और दूसरे वे जो अपने लेखन से  दुनिया को देखने का एक नया और अलग  नज़रिया दे जाते हैं। राही मासूम रज़ा इसी दूसरी श्रेणी के एक लोकप्रिय रचनाकार थे। साहित्य की दुनिया के इस स्वनामधन्य रचनाकार का गाज़ीपुर से होना हम गाज़ीपुर वासियों के लिए सिर्फ एक तथ्य नहीं, बल्कि एक बहुत ही निजी और गौरवशाली अदबी अहसास है। वे केवल एक नाम नहीं, बल्कि एक संस्कृति के रूप में थे जो हमारे बीच से निकलकर पूरे भारत की आवाज़ बन गए। गंगौली से बॉम्बे तक का सफ़र                       राही मासूम रज़ा साहब का जन्म गाज़ीपुर के एक छोटे से गाँव ‘गंगौली‘ में हुआ। आज गंगौली का नाम वैश्विक साहित्य के मानचित्र पर दर्ज है, तो इसका श्रेय राही साहब की कलम को ही जाता है। उन्होंने यह साबित कर दिया कि महानता के लिए महानगरों की चकाचौंध अनिवार्य नहीं है; मिट्टी की सोंधी महक और गाँव की गलियों के अनुभव भी एक विश्वस्तरीय साहित्यकार को जन्म दे सकते हैं। पूर्वी उत्तर प्रदेश के खेतों से शुरू हुआ उनका यह सफ़र अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी की बौद्धिक बहसों से होता हुआ बॉम्बे की फ़िल्मी दुनिया तक पहुँचा, लेकिन उनकी जड़ें हमेशा गंगौली में(कितनी चिड़िया उड़े आकाश/ दाना है धरती के पास) ही जमी रहीं। गाज़ीपुर का सांस्कृतिक दूत स्वयं  गाज़ीपुर से होने के नाते, मुझे गर्व होता है कि राही मासूम रज़ा हमारे सबसे बड़े सांस्कृतिक दूत थे। जब पूरा देश उनका कालजयी उपन्यास ‘आधा गाँव‘ पढ़ता है या ‘महाभारत‘ धारावाहिक देखता है, तो वे अनजाने में ही हमारे अंचल की भाषा, यहाँ के हास्य और यहाँ के सरोकारों से जुड़ रहे होते हैं। राही जहाँ भी गए, गाज़ीपुर को अपने दिल में बसाकर ले गए। उन्होंने अपनी रचनाओं के माध्यम से एक सच्चे कलाकार की तरह  स्थानीयता को वैश्विक पहचान दी। साहित्य में आम आदमी की धड़कन …
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